रोशनी का रास्ता

roshni ka raasta

आपकी आत्मा जो
खोज रही है

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01

कुछ है जो
अधूरा है

नौकरी है। परिवार है। सब कुछ ठीक दिखता है।

लेकिन अंदर से... कुछ खाली लगता है।

वो अहसास कि ज़िंदगी में कुछ और होना चाहिए
वो सवाल जो रात को अकेले में उठता है — "मैं किसलिए जी रहा हूँ?"
वो शांति जो आती है और चली जाती है, कभी टिकती नहीं

आप अकेले नहीं हैं।
पूरी दुनिया में लोग यही महसूस करते हैं।

और इसकी एक वजह है।

02

हर जगह एक ही बात:
"और मेहनत करो"

और पूजा करो। और व्रत रखो। और तीर्थ जाओ।
और अच्छे कर्म करो। और ज़्यादा दान दो।

हर धर्म, हर परंपरा कहती है:
"शांति पाने के लिए तुम्हें कुछ करना होगा"

सारा बोझ आपके कंधों पर।
और कभी पक्का नहीं पता कि "काफ़ी हुआ या नहीं"

जन्म-मृत्यु का चक्र। कर्म का हिसाब। अंतहीन यात्रा जिसकी कोई मंज़िल नज़र नहीं आती।

लेकिन अगर
सब कुछ उल्टा हो?

03

आपको ईश्वर तक
पहुँचने की ज़रूरत नहीं।
ईश्वर आप तक आ गए।

2,000 साल पहले, मध्य पूर्व के एक छोटे से इलाक़े में एक संदेश आया जिसने मानव इतिहास बदल दिया।

यह संदेश किसी भी धर्म से अलग था।

क्योंकि हर प्रणाली सिखाती है कि "इंसान को ईश्वर की ओर चढ़ना होगा"
लेकिन इस संदेश ने बिल्कुल उल्टा कहा:

"ईश्वर इंसान के पास उतर आए।"

आपको चोटी तक चढ़ने की ज़रूरत नहीं।
आपको परफ़ेक्ट होने की ज़रूरत नहीं।
आपको कुछ साबित करने की ज़रूरत नहीं।

क्योंकि जिसने आपको बनाया, वो ख़ुद आपसे मिलने आया।

04

स्वर्ग का राज्य
एक बिल्कुल अलग व्यवस्था

यह कोई धर्म नहीं है।
कोई संगठन नहीं।
कोई इमारत नहीं।

यह है स्वर्ग का राज्य — एक ऐसी व्यवस्था जो हर चीज़ से उल्टी है जो आपने जानी है:

  • प्रवेश बिल्कुल मुफ़्त है। कोई पुण्य नहीं, कोई मेहनत नहीं।
  • इस राज्य का राजा शासन करने नहीं, सेवा करने आया।
  • कोई जाति नहीं, कोई ऊँच-नीच नहीं। हर इंसान बराबर
  • कोई पुनर्जन्म नहीं। एक फ़ैसला — और हमेशा के लिए सब बदल जाता है।
  • शर्तों वाला प्यार नहीं — बिना शर्त प्यार जो पहले से दिया गया है।

आप कहाँ पैदा हुए, कौन सी जाति, क्या अतीत रहा —
कुछ भी मायने नहीं रखता।

इस राज्य का दरवाज़ा आपके लिए खुला है।

05

इस राज्य के राजा
का एक नाम है

वो किसी महल में पैदा नहीं हुए।
एक ग़रीब परिवार में, एक छोटे से गाँव में जन्मे।

उन्होंने ताक़त नहीं दिखाई।
बल्कि अपने शागिर्दों के पैर धोए।

उन्होंने उन लोगों से प्यार किया जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया था।
बीमारों को ठीक किया, अकेलों के पास बैठे, बच्चों को गले लगाया।

और उन्होंने कहा:

"मार्ग, सत्य
और जीवन
मैं ही हूँ।"

उन्होंने रास्ता दिखाया नहीं।
उन्होंने कहा कि वो ख़ुद रास्ता हैं।

उनका नाम है ईसा मसीह (यीशु)।
और उनकी कहानी 2,000 साल बाद आज भी दुनिया भर में अरबों लोगों की ज़िंदगी बदल रही है।

06

यह तोहफ़ा
अभी आपके लिए
तैयार है

कोई अनुष्ठान नहीं।
कोई क़ीमत नहीं।
कोई बंधन नहीं।

बस एक फ़ैसला।

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ईसा मसीह की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी -- हिंदी में मुफ़्त पढ़ें

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